(क) मेरे सूट में साढ़े
तीन मीटर कपड़ा लगेगा।
(ख) दस किलो चीनी ले आओ।
(ग) दो लिटर दूध गरम करो।
(2) अनिश्चित
परिमाणवाचक विशेषण- जिन विशेषण शब्दों से
वस्तु की अनिश्चित मात्रा का ज्ञान हो। जैसे-
(क) थोड़ी-सी नमकीन
वस्तु ले आओ।
(ख) कुछ आम दे दो।
(ग) थोड़ा-सा दूध गरम कर दो।
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जिन विशेषण शब्दों से
संज्ञा या सर्वनाम की संख्या का बोध हो वे संख्यावाचक विशेषण कहलाते हैं।
जैसे-
एक, दो, द्वितीय, दुगुना, चौगुना,
पाँचों आदि।
संख्यावाचक विशेषण के दो उपभेद हैं-
निश्चित संख्यावाचक के
निम्नलिखित चार भेद हैं-
(क) गणवाचक-
जिन शब्दों के द्वारा गिनती का बोध हो। जैसे-
(ख)
क्रमवाचक- जिन शब्दों के द्वारा संख्या के क्रम
का बोध हो। जैसे-
(ग)
आवृत्तिवाचक- जिन शब्दों के द्वारा केवल आवृत्ति का
बोध हो। जैसे-
(1) मोहन तुमसे चौगुना
काम करता है।
(2) गोपाल तुमसे दुगुना मोटा है।
(घ)
समुदायवाचक- जिन शब्दों के द्वारा केवल सामूहिक
संख्या का बोध हो। जैसे-
4.
संकेतवाचक (निर्देशक) विशेषण
तुलना
की दृष्टि से विशेषणों की निम्नलिखित तीन अवस्थाएँ होती हैं-
(1) मूलावस्था
1. पंजाब में अधिकतम अन्न होता है।
(1)
अधिक और सबसे अधिक शब्दों का प्रयोग करके उत्तरावस्था और
उत्तमावस्था के रूप बनाए जा सकते हैं। जैसे-
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