अध्याय-13 (क्रिया-विशेषण)

1.कालवाचक क्रिया-विशेषण-

®   जिस क्रिया-विशेषण शब्द से कार्य के होने का समय ज्ञात हो वह कालवाचक क्रिया-विशेषण कहलाता है। इसमें बहुधा ये शब्द प्रयोग में आते हैं-

®   यदा, कदा, जब, तब, हमेशा, तभी, तत्काल, निरंतर, शीघ्र, पूर्व, बाद, पीछे, घड़ी-घड़ी, अब, तत्पश्चात्, तदनंतर, कल, कई बार, अभी फिर कभी आदि।

2.स्थानवाचक क्रिया-विशेषण-

®   जिस क्रिया-विशेषण शब्द द्वारा क्रिया के होने के स्थान का बोध हो वह स्थानवाचक क्रिया-विशेषण कहलाता है। इसमें बहुधा ये शब्द प्रयोग में आते हैं-

®   भीतर, बाहर, अंदर, यहाँ, वहाँ, किधर, उधर, इधर, कहाँ, जहाँ, पास, दूर, अन्यत्र, इस ओर, उस ओर, दाएँ, बाएँ, ऊपर, नीचे आदि।

3.परिमाणवाचक क्रिया-विशेषण-

®   जो शब्द क्रिया का परिमाण बतलाते हैं वे परिमाणवाचक क्रिया-विशेषण कहलाते हैं। इसमें सर्वथा आदि शब्द प्रयोग में आते हैं-

®   बहुधा थोड़ा-थोड़ा, अत्यंत, अधिक, अल्प, बहुत, कुछ, पर्याप्त, प्रभूत, कम, न्यून, बूँद-बूँद, स्वल्प, केवल, प्रायः अनुमानतः आदि।
कुछ शब्दों का प्रयोग परिमाणवाचक विशेषण और परिमाणवाचक क्रिया-विशेषण दोनों में समान रूप से किया जाता है। जैसे- थोड़ा, कम, कुछ काफी आदि।

4.रीतिवाचक क्रिया-विशेषण-

®   जिन शब्दों के द्वारा क्रिया के संपन्न होने की रीति का बोध होता है वे रीतिवाचक क्रिया-विशेषण कहलाते हैं। इनमें बहुधा ये शब्द प्रयोग में आते हैं-

®   अचानक, सहसा, एकाएक, झटपट, आप ही, ध्यानपूर्वक, धड़ाधड़, यथा, तथा, ठीक, सचमुच, अवश्य, वास्तव में, निस्संदेह, बेशक, शायद, संभव हैं, कदाचित्, बहुत करके, हाँ, ठीक, सच, जी, जरूर, अतएव, किसलिए, क्योंकि, नहीं, , मत, कभी नहीं, कदापि नहीं आदि।


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