अध्याय-12 (वाच्य)

अध्याय-12 (वाच्य)

वाच्य-

®   क्रिया के जिस रूप से यह ज्ञात हो कि वाक्य में क्रिया द्वारा संपादित विधान का विषय कर्ता है, कर्म है, अथवा भाव है, उसे वाच्य कहते हैं।
वाच्य के तीन प्रकार हैं-
1. कर्तृवाच्य।

     2. कर्मवाच्य।

     3. भाववाच्य।

1.कर्तृवाच्य-

®   क्रिया के जिस रूप से वाक्य के उद्देश्य (क्रिया के कर्ता) का बोध हो, वह कर्तृवाच्य कहलाता है। इसमें लिंग एवं वचन प्रायः कर्ता के अनुसार होते हैं। जैसे-
1.बच्चा खेलता है।

     2.घोड़ा भागता है।

®   इन वाक्यों में बच्चा’, ‘घोड़ाकर्ता हैं तथा वाक्यों में कर्ता की ही प्रधानता है। अतः खेलता है’, ‘भागता हैये कर्तृवाच्य हैं।

2.कर्मवाच्य-

®   क्रिया के जिस रूप से वाक्य का उद्देश्यकर्मप्रधान हो उसे कर्मवाच्य कहते हैं। जैसे-

®   इन वाक्यों में क्रियाओं मेंकर्मकी प्रधानता दर्शाई गई है। उनकी रूप-रचना भी कर्म के लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार हुई है। क्रिया के ऐसे रूपकर्मवाच्यकहलाते हैं।

3.भाववाच्य-

®   क्रिया के जिस रूप से वाक्य का उद्देश्य केवल भाव (क्रिया का अर्थ) ही जाना जाए वहाँ भाववाच्य होता है। इसमें कर्ता या कर्म की प्रधानता नहीं होती है।

इसमें मुख्यतः अकर्मक क्रिया का ही प्रयोग होता है और साथ ही प्रायः निषेधार्थक वाक्य ही भाववाच्य में प्रयुक्त होते हैं। इसमें क्रिया सदैव पुल्लिंग, अन्य पुरुष के एक वचन की होती है।

प्रयोग-

प्रयोग तीन प्रकार के होते हैं-
1. कर्तरि प्रयोग।

2. कर्मणि प्रयोग।

3. भावे प्रयोग।

1.कर्तरि प्रयोग-

®   जब कर्ता के लिंग, वचन और पुरुष के अनुरूप क्रिया हो तो वह कर्तरि प्रयोगकहलाता है। जैसे-
1. लड़का पत्र लिखता है।

     2. लड़कियाँ पत्र लिखती है।

®   इन वाक्यों में लड़काएकवचन, पुल्लिंग और अन्य पुरुष है और उसके साथ क्रिया भी लिखता हैएकवचन, पुल्लिंग और अन्य पुरुष है। इसी तरह लड़कियाँ पत्र लिखती हैंदूसरे वाक्य में कर्ता बहुवचन, स्त्रीलिंग और अन्य पुरुष है तथा उसकी क्रिया भी लिखती हैंबहुवचन स्त्रीलिंग और अन्य पुरुष है।

2.कर्मणि प्रयोग-

®   जब क्रिया कर्म के लिंग, वचन और पुरुष के अनुरूप हो तो वह कर्मणि प्रयोग कहलाता है।

जैसे-

®   इन वाक्यों की क्रियाओं के लिंग, वचन और पुरुष न कर्ता के अनुसार हैं और न ही कर्म के अनुसार, अपितु वे एकवचन, पुल्लिंग और अन्य पुरुष हैं। इस प्रकार के प्रयोग भावे प्रयोग कहलाते हैं।

वाच्य परिवर्तन

1.कर्तृवाच्य से कर्मवाच्य बनाना-

(1) कर्तृवाच्य की क्रिया को सामान्य भूतकाल में बदलना चाहिए।
(2) उस परिवर्तित क्रिया-रूप के साथ काल, पुरुष, वचन और लिंग के अनुरूप जाना क्रिया का रूप जोड़ना चाहिए।
(3) इनमें सेअथवा के द्वाराका प्रयोग करना चाहिए। जैसे-

    कर्तृवाच्य                                       कर्मवाच्य

1.श्यामा उपन्यास लिखती है।     ®  श्यामा से उपन्यास लिखा जाता है।
2.श्यामा ने उपन्यास लिखा।       ®  श्यामा से उपन्यास लिखा गया।
3.श्यामा उपन्यास लिखेगी।        ®  श्यामा से (के द्वारा) उपन्यास लिखा जाएगा।

2.कर्तृवाच्य से भाववाच्य बनाना-

(1) इसके लिए क्रिया अन्य पुरुष और एकवचन में रखनी चाहिए।
(2) कर्ता में करण कारक की विभक्ति लगानी चाहिए।
(3) क्रिया को सामान्य भूतकाल में लाकर उसके काल के अनुरूप जाना क्रिया का रूप जोड़ना चाहिए।
(4) आवश्यकतानुसार निषेधसूचक नहींका प्रयोग करना चाहिए।

जैसे-

 कर्तृवाच्य                         भाववाच्य
1.बच्चे नहीं दौड़ते।       ®  बच्चों से दौड़ा नहीं जाता।
2.पक्षी नहीं उड़ते।        ®  पक्षियों से उड़ा नहीं जाता।
3.बच्चा नहीं सोया।       ®  बच्चे से सोया नहीं जाता।


Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.

India’s No.1 PDF for All UPSC, HSSC & Other Govt Exam’s