यथासामर्थ्य - सामर्थ्य के अनुसार
यथाशक्ति - शक्ति के अनुसार,
यथाविधि -
विधि के अनुसार
यथाक्रम - क्रम के अनुसार,
भरपेट -
पेट भरकर
हररोज़ - रोज़-रोज़,
हाथोंहाथ - हाथ ही हाथ में
रातोंरात - रात ही रात में,
प्रतिदिन - प्रत्येक दिन
बेशक - शक के बिना,
निडर - डर के बिना
निस्संदेह - संदेह के बिना,
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जिस समास का उत्तरपद
प्रधान हो और पूर्वपद गौण हो उसे तत्पुरुष समास कहते हैं।
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जिस समास में पहला पद
निषेधात्मक हो उसे नञ तत्पुरुष समास कहते हैं। जैसे-
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संधि वर्णों में होती है।
इसमें विभक्ति या शब्द का लोप नहीं होता है। जैसे- देव+आलय = देवालय।
कर्मधारय
और बहुव्रीहि समास में अंतर-
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कर्मधारय में समस्त-
पद का एक पद दूसरे का विशेषण होता है। इसमें शब्दार्थ प्रधान होता है।
जैसे-
नील+कंठ = नीला है कंठ जिसका अर्थात शिव।
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